Friday, March 6, 2026
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उत्तराखंड में सरकारी भूमि विवाद डाकपत्थर की 77 हैकटेयर जमीन यूआईडीबी को हस्तांतरण करने पर सियासी हलचल

उत्तराखंड में सरकारी भूमि विवाद: डाकपत्थर की 77 हेक्टेयर जमीन UIDB को हस्तांतरण पर सियासी हलचल

देहरादून/विकासनगर: अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के मनरेगा बचाओ संग्राम के उत्तराखंड प्रदेश कोऑर्डिनेटर एवं पूर्व मंडी अध्यक्ष विपुल जैन ने डाकपत्थर स्थित उत्तराखंड जल विद्युत निगम (UJVN) की लगभग 77 हेक्टेयर भूमि को उत्तराखंड इंफ्रास्ट्रक्चर एंड इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट बोर्ड (UIDB) को बिना विधिसम्मत प्रक्रिया के हस्तांतरित करने के मामले में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य से मुलाकात की। विपुल जैन ने इस मुद्दे को आगामी विधानसभा सत्र में मजबूती से उठाने की मांग की।

विपुल जैन ने नेता प्रतिपक्ष को विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि यह भूमि किसानों से 1962 से पूर्व परियोजना के निश्चित उपयोग के लिए अधिग्रहित की गई थी। हालांकि, 29 अगस्त 2025 को मुख्य सचिव उत्तराखंड की अध्यक्षता में हुई बैठक में एकतरफा निर्णय लेकर इसे बहुत कम कीमत पर चहेती कंपनियों को देने का फैसला लिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह निर्णय नियम-विरुद्ध है और इससे प्रदेश में लैंड बैंक खत्म हो जाएगा, जो भविष्य के जनहित और विकास कार्यों के लिए हानिकारक साबित होगा।

नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने मामले को गंभीरता से लिया और पूरी जांच-स्टडी के बाद आगामी विधानसभा सत्र में सरकार के समक्ष मजबूती से उठाने का आश्वासन दिया। साथ ही, उन्होंने डाकपत्थर का स्थलीय निरीक्षण शीघ्र करने की मांग भी स्वीकार कर ली।

मुलाकात के दौरान विपुल जैन के साथ डाकपत्थर के स्थानीय निवासी श्री वैभव शर्मा, एस.बी. शर्मा, तेजपाल सिंह, भगवान शर्मा, तनवीर आलम आदि मौजूद रहे। इनके पूर्वजों ने अपनी भूमि परियोजना के लिए दी थी, और उन्होंने संबंधित दस्तावेज भी नेता प्रतिपक्ष को सौंपे।

यह मामला हाल के दिनों में उत्तराखंड की राजनीति में गरमा गया है, जहां विपक्ष सरकार पर सरकारी जमीनों को औने-पौने दामों में निजी हितों को सौंपने का आरोप लगा रहा है। दिसंबर 2025 में जारी शासनादेश के तहत UJVN की डाकपत्थर एवं ढालीपुर वाली लगभग 76.73 हेक्टेयर भूमि को UIDB को हस्तांतरित करने के निर्देश दिए गए थे, जिसका विरोध बिजली कर्मचारियों और स्थानीय लोगों द्वारा भी किया जा रहा है।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा है कि UJVN बोर्ड की मंजूरी के बिना यह हस्तांतरण अवैध है। यह मुद्दा विधानसभा में गूंज सकता है और प्रदेश के विकास एवं भूमि नीति पर बड़ा असर डाल सकता है।

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