हरियाणा के दबंग खनन माफिया उत्तराखंड में उड़ा रहे नियमों की धज्जियां
देहरादून जिले की तहसील विकासनगर अंतर्गत सहसपुर विधानसभा क्षेत्र के कैंची वाला अब्दुल्लापुर में एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां हरियाणा से आए खनन माफिया ने स्वरना नदी के किनारे खुले मैदान में देवभूमि स्टोन क्रेशर के स्टोन क्रशर स्थापित कर उत्तराखंड सरकार की खनन नियमावली को खुलेआम ताक पर रख दिया है। यह क्रशर बिना किसी अनुमति या सुरक्षा मानकों के संचालित हो रहा है, जिससे पर्यावरण और स्थानीय निवासियों को भारी नुकसान हो रहा है।
प्रमुख उल्लंघन और समस्याएं
खुला संचालन बिना सुरक्षा के: क्रशर के चारों ओर कोई चारदीवारी नहीं है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PCB) के नियमों के अनुसार धूलकण सोखने के लिए हरे पेड़ों की श्रृंखला या स्प्रिंकलर सिस्टम नहीं लगाया गया।
दूषित पानी का सीधा नदी में निर्वहन: क्रशर से निकलने वाला गंदा, जहरीला पानी बिना किसी रिसाइक्लिंग प्लांट के स्वरना नदी में छोड़ा जा रहा है। यह पानी आगे आसन झील में मिलता है, जहां हजारों जलीय जीवों और प्रवासी साइबेरियन पक्षियों (जैसे साइबेरियन क्रेन आदि) की जान खतरे में पड़ गई है।
माफिया का दबंग रवैया: क्रशर संचालक (हरियाणा मूल के) खुले मैदान में मशीनों पर “बंदर की तरह कलाबाजी” करते नजर आते हैं, जो हंसी का पात्र बन गया है, लेकिन पर्यावरणीय खतरे को दर्शाता है।
प्रशासन की नाकामी: उत्तराखंड खनन नियमावली (जिसमें क्रशर के लिए न्यूनतम दूरी, प्रदूषण नियंत्रण, पानी प्रबंधन आदि अनिवार्य हैं) की धज्जियां उड़ रही हैं। सफेदपोश संरक्षण में यह क्रशर चल रहा है।
जिला खनन अधिकारी पर सवाल
नवनियुक्त जिला खनन अधिकारी ऐश्वर्या के चार्ज संभालने के बाद माफिया के हौसले बुलंद हो गए हैं। अधिकारी मुख्य रूप से ट्रैक्टर-ट्रॉली या छोटे वाहनों के पीछे भागकर “ड्यूटी” पूरी करते दिखते हैं, लेकिन ऐसे बड़े अवैध क्रशर/जोन तक पहुंचने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे। सप्ताह में दो-चार छोटे वाहन पकड़कर रिपोर्ट भेजना उनकी “कार्रवाई” बन गई है।
पर्यावरणीय और राजस्व नुकसान
स्वरना नदी और आसन झील का प्रदूषण बढ़ रहा है, जो स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए घातक है।
राज्य सरकार को खनन से होने वाला राजस्व लूटा जा रहा है, जबकि अवैध संचालन से पर्यावरण क्षति और स्वास्थ्य जोखिम बढ़ रहे हैं।
उत्तराखंड में अवैध खनन और क्रशरों के खिलाफ हाईकोर्ट व विभागीय कार्रवाई के कई मामले सामने आए हैं (जैसे विकासनगर में क्रशर सीज, ओवरलोडिंग पर जुर्माना), लेकिन इस मामले में अब तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठा।
यह मामला केवल एक क्रशर का नहीं, बल्कि खनन माफिया की सरपरस्ती, प्रशासनिक लापरवाही और पर्यावरणीय संकट का प्रतीक बन चुका है। स्थानीय निवासी और पर्यावरण प्रेमी सवाल उठा रहे हैं—आखिर उत्तराखंड सरकार अपनी राजस्व संपदा और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा कब करेगी? या ऐसे अवैध क्रशर इसी तरह चलते रहेंगे?
प्रशासन से मांग है कि तत्काल जांच कर क्रशर सीज किया जाए, माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए। अन्यथा, यह संकट आसन झील और स्वरना नदी के अस्तित्व पर बड़ा खतरा बन सकता है।


