देहरादून: उत्तराखंड के आसन वेटलैंड कंजर्वेशन रिजर्व (रामसर साइट) के निकट अवैध स्टोन क्रशरों के संचालन को लेकर मां यमुना रक्षक संघ ने तीखी आपत्ति जताई है। संघ ने 8 जनवरी 2026 को उप जिलाधिकारी विकासनगर के माध्यम से जिलाधिकारी देहरादून को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा, जिसमें तत्काल कार्रवाई की मांग की गई है। साथ ही प्रधानमंत्री शिकायत पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई गई और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) को ईमेल के जरिए मामला पहुंचाया गया है।
ज्ञापन में उठाए गए प्रमुख मुद्दे:
स्थान और उल्लंघन: तहसील विकासनगर के ग्राम ढकरानी में यमुना नदी किनारे करीब 20 स्टोन क्रशर अवैध रूप से संचालित हो रहे हैं। ये आसन झील से मात्र 4-5 किमी की दूरी पर हैं, जबकि NGT के आदेशों के अनुसार रामसर साइट की 10 किमी हवाई परिधि में खनन एवं क्रशर जैसी गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध है।
पर्यावरणीय नुकसान:
सैकड़ों हरे फलदार वृक्षों (मुख्यतः आम के पेड़) की अवैध कटाई।
सैकड़ों बीघा कृषि भूमि उजाड़ दी गई।
धूल प्रदूषण से स्थानीय निवासियों, उत्तराखंड जल विद्युत निगम कॉलोनी में सांस की बीमारियां और आंखों में जलन।
तेज शोर से स्कूली बच्चों के स्वास्थ्य पर बुरा असर।
क्रशरों से निकला दूषित पानी बिना ट्रीटमेंट के खेतों में बहाया जा रहा, जिससे फसलें नष्ट हो रही हैं और किसानों की आजीविका खतरे में है।
अन्य गंभीर खतरे:
ओवरलोडेड ट्रकों से शक्ति नहर और पुलों को खतरा (उच्च न्यायालय नैनीताल के आदेश के बावजूद भारी वाहनों का आवागमन)।
ट्रक आसन झील से महज 50 मीटर दूरी से गुजर रहे, जिससे प्रवासी पक्षियों (रुडी शेलडक, गैडवाल आदि), वन्यजीवों और जलजीवों पर प्रतिकूल प्रभाव।
रात्रि में यमुना नदी से मशीनी अवैध खनन, जो उच्च न्यायालय के आदेशों की खुली अवहेलना है।
प्रार्थना: सभी क्रशरों पर तत्काल रोक, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और NGT/उच्च न्यायालय के आदेशों का सख्ती से पालन।
संलग्न साक्ष्य:
उच्च न्यायालय के पुलों संबंधी आदेश की प्रतियां।
प्रभावित क्षेत्र की फोटोग्राफ्स।
प्रतिलिपि मुख्य सचिव उत्तराखंड, प्रधान सचिव पर्यावरण एवं वन विभाग, उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, NGT, पुलिस अधीक्षक देहरादून आदि को भेजी गई है।
वर्तमान स्थिति:
आसन कंजर्वेशन रिजर्व उत्तराखंड का पहला रामसर स्थल है, जो यमुना-असन नदी के संगम पर स्थित है और प्रवासी पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण है। जनवरी 2026 में सोशल मीडिया (फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर इसी क्षेत्र में अवैध क्रशरों के जाल, हजारों पेड़ों की कटाई और पर्यावरण क्षति की खबरें वायरल हुईं। विकासनगर में 15 जनवरी 2026 को विभागीय टीम द्वारा दो स्टोन क्रशरों को निलंबित करने की कार्रवाई की सूचना मिली है, लेकिन स्थानीय लोग दावा कर रहे हैं कि अधिकांश क्रशर अभी भी चल रहे हैं।
NGT और उच्च न्यायालय ने पहले भी देहरादून क्षेत्र में अवैध खनन/क्रशरों पर जुर्माना और जांच के आदेश दिए हैं, लेकिन आसन वेटलैंड के मामले में अभी तक कोई निर्णायक कार्रवाई नहीं दिख रही। पर्यावरण प्रेमी और स्थानीय किसान प्रशासन से त्वरित हस्तक्षेप की उम्मीद कर रहे हैं, ताकि इस संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र को अपूरणीय क्षति से बचाया जा सके


