उत्तराखंड के यमुना घाटी क्षेत्र (डाकपत्थर, ढकरानी, ढालीपुर, कुल्हाल आदि) में उत्तराखंड विद्युत अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा के नेतृत्व में हजारों बिजली कर्मचारियों ने कार्य बहिष्कार (वर्क बॉयकॉट/हड़ताल) किया और जोरदार विरोध प्रदर्शन आयोजित किया। यह विरोध मुख्य रूप से केंद्र सरकार के इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 और प्रस्तावित नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी 2026 के खिलाफ है, जिन्हें कर्मचारी पावर सेक्टर के बड़े पैमाने पर निजीकरण का रास्ता बताते हैं।
मुख्य मांगें और विरोध के कारण
पावर सेक्टर का निजीकरण रोकना (वितरण, उत्पादन और ट्रांसमिशन सहित, जिसमें TBCB मॉडल शामिल है)।
इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 और नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी 2026 को तत्काल वापस लेना।
यमुना परियोजना की भूमि (जैसे डाकपत्थर क्षेत्र की 76.73 हेक्टेयर भूमि) को उत्तराखंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड (UIDB) या व्यावसायिक उपयोग के लिए हस्तांतरित करने वाले शासनादेश को निरस्त करना।
आउटसोर्स/ठेका कर्मचारियों का नियमितीकरण, नियमित पदों पर सीधी भर्ती और आउटसोर्सिंग पर रोक।
पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली।
उत्तर प्रदेश में चल रही निजीकरण प्रक्रिया को रोकना।
कर्मचारियों की अन्य लंबित समस्याओं का समाधान।
यमुना घाटी के विभिन्न पावर हाउस और परियोजनाओं (लखवाड़-व्यासी, इच्छाड़ी डैम, छिबरो, खोदरी, डाकपत्थर, ढकरानी, ढालीपुर, कुल्हाल, आसन बैराज आदि) पर कर्मचारियों ने धरना, गेट मीटिंग और जुलूस निकाले। डाकपत्थर में विद्युत भवन से तिकोना पार्क तक विशाल रैली निकाली गई, जिसमें सैकड़ों कर्मचारी, स्थानीय व्यापारी और ट्रेड यूनियन पदाधिकारी शामिल हुए।
चेतावनी और बड़ा ऐलान
संयोजकों (गोपाल बिहारी, प्रकाश कुमार, संजय राणा आदि) ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि संसद के बजट सत्र में बिल पारित करने की कोशिश हुई, तो देश के लगभग 27 लाख बिजली कर्मचारी बिना अतिरिक्त नोटिस के ‘लाइटनिंग स्ट्राइक’ (तत्काल हड़ताल) पर चले जाएंगे। इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी। यदि यमुना परियोजना की भूमि हस्तांतरण आदेश निरस्त नहीं हुआ, तो राज्य स्तर पर हड़ताल शुरू हो सकती है।
व्यापक संदर्भ
यह विरोध ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (AIPEF) और नेशनल कोऑर्डिनेशन कमिटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी एम्प्लॉयीज़ एंड इंजीनियर्स (NCCOEEE) के आह्वान पर हुआ, जो 12 फरवरी 2026 को देशव्यापी एक दिवसीय हड़ताल का हिस्सा था। पहली बार संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) और 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने भी बिजली कर्मचारियों का समर्थन किया, जिससे यह स्वतंत्र भारत की प्रमुख हड़तालों में शामिल हो गई। कर्मचारी दावा करते हैं कि निजीकरण से गरीब उपभोक्ताओं, छोटे-मध्यम उद्योगों और आम जनता के हित प्रभावित होंगे, क्योंकि इससे बिजली दरें बढ़ सकती हैं और सेवा की गुणवत्ता घट सकती है।
प्रमुख नेता और भागीदारी
डाकपत्थर: गोपाल बिहारी, अनुज कुमार, संजय राणा, याकूब अली, राजेश तिवारी आदि।
ढकरानी: बृजमोहन तिवारी, परमेंद्र, कलम सिंह चौहान आदि।
अन्य: अमित रंजन, अजय कुमार सिंह, पंकज सैनी, वेदपाल आर्य आदि ने रैली का नेतृत्व किया।


