Saturday, March 7, 2026
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वन्य जीव हमले में उत्तराखंड सरकार ने बढाई सहायता राशि

देहरादून। उत्तराखंड में मानव-वन्यजीव संघर्ष से प्रभावित लोगों के लिए सरकार ने एक बड़ी राहत देने वाला फैसला लिया है। अब जंगली जानवरों के हमले में घायल व्यक्तियों के इलाज पर राज्य सरकार ₹15 लाख तक का खर्च उठाएगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की घोषणा के अनुरूप इस प्रस्ताव पर तेजी से कार्रवाई की जा रही है और जल्द ही इसका शासनादेश जारी होने जा रहा है।

सरकार के निर्णय के अनुसार, घायल व्यक्ति के इलाज में ₹5 लाख तक की राशि अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना के अंतर्गत खर्च की जाएगी, जबकि शेष ₹10 लाख तक की अतिरिक्त राशि राज्य सरकार स्वयं वहन करेगी। यह व्यवस्था उन मामलों में विशेष रूप से मददगार होगी, जहां घायलों को गंभीर चोटें आई हों और महंगे इलाज की आवश्यकता पड़ती हो।

प्रदेश के अधिकांश क्षेत्रों में गुलदार, बाघ, भालू और हाथियों के हमले लगातार चिंता का विषय बने हुए हैं। पहाड़ी से लेकर मैदानी जिलों तक मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ी हैं। हालांकि सरकार ने पूर्व में वन्यजीव हमले में मृत्यु पर मुआवजा राशि को छह लाख से बढ़ाकर दस लाख रुपये किया था, लेकिन घायलों के उपचार के लिए कोई स्पष्ट
अब तक वन्यजीव हमले में घायल व्यक्तियों को केवल मानव-वन्यजीव संघर्ष राहत वितरण निधि के तहत 15 हजार से तीन लाख रुपये तक का मुआवजा दिया जाता था। गंभीर मामलों में यह राशि अपर्याप्त साबित हो रही थी, क्योंकि कई बार निजी अस्पतालों में इलाज कराना मजबूरी बन जाता है।
इस कमी को देखते हुए मुख्यमंत्री ने हाल में वन्यजीव हमलों में घायलों के इलाज के लिए अतिरिक्त सहायता की घोषणा की थी। इसके अनुपालन में वन विभाग ने प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेज दिया है, जिस पर वित्त विभाग से राय ली जा चुकी है।
प्रमुख सचिव वन आर.के. सुधांशु के अनुसार, अटल आयुष्मान योजना के अतिरिक्त ₹10 लाख तक की राशि राज्य सरकार द्वारा वहन करने संबंधी प्रस्ताव जल्द ही स्वीकृत किया जाएगा। इस बीच शासन ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वन्यजीव हमले की किसी भी घटना में घायलों के उपचार में कोई कोताही न बरती जाए और जरूरत पड़ने पर तत्काल समुचित चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

सरकार के इस फैसले से उन ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों के लोगों को बड़ी राहत मिलेगी, जहां वन्यजीव हमले की घटनाएं अधिक होती हैं। इससे न केवल पीड़ित परिवारों पर आर्थिक बोझ कम होगा, बल्कि समय पर बेहतर इलाज मिलने से जान बचाने की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।

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