एक ऐसे प्रशासनिक सफर की कहानी, जिसने देहरादून में अपनी अलग पहचान छोड़ी…
कुछ अधिकारी सिर्फ कुर्सी संभालते हैं…
और कुछ अपने काम से लोगों के दिलों में जगह बना लेते हैं।
देहरादून के जिलाधिकारी के रूप में सविन बंसल का कार्यकाल उन्हीं चुनिंदा अधिकारियों में गिना जाएगा, जिन्हें लोग लंबे समय तक याद रखते हैं।
उन्होंने प्रशासन को केवल फाइलों और मीटिंग्स तक सीमित नहीं रहने दिया। आम लोगों की समस्याओं को सुनना, मौके पर पहुंचकर हालात समझना और तुरंत समाधान करवाना उनकी कार्यशैली की सबसे बड़ी पहचान बनी। शायद यही वजह रही कि जनता उन्हें सिर्फ “डीएम साहब” नहीं, बल्कि एक भरोसेमंद अधिकारी के रूप में देखने लगी।
गरीब, जरूरतमंद और परेशान लोगों की मदद के लिए उनका रवैया हमेशा संवेदनशील दिखाई दिया। जन शिकायतों पर तेज कार्रवाई हो या अधिकारियों को सीधे मौके पर भेजकर राहत दिलाना — उन्होंने कई बार साबित किया कि प्रशासन अगर चाहे तो फर्क ला सकता है।
देहरादून में भूमाफियाओं और अवैध कब्जों के खिलाफ उनकी सख्ती भी लगातार चर्चा में रही। सरकारी जमीनों को मुक्त कराने से लेकर फर्जीवाड़ों पर कार्रवाई तक, उन्होंने साफ संदेश दिया कि कानून से ऊपर कोई नहीं।
शहर की ट्रैफिक, अतिक्रमण और पार्किंग जैसी पुरानी समस्याओं पर भी प्रशासनिक सक्रियता देखने को मिली। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और जनसुनवाई व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में भी उनके प्रयास साफ नजर आए।
सबसे खास बात यह रही कि आपदा या किसी भी आपात स्थिति में वे केवल आदेश देने तक सीमित नहीं रहे, बल्कि खुद मैदान में उतरकर राहत कार्यों की निगरानी करते दिखाई दिए। यही एक संवेदनशील और जिम्मेदार अधिकारी की पहचान होती है।
अब उन्हें सचिव नियोजन की नई जिम्मेदारी मिली है, लेकिन देहरादून में उनका कार्यकाल एक ऐसे अधिकारी के रूप में याद किया जाएगा जिसने सख्ती और संवेदनशीलता — दोनों के बीच बेहतरीन संतुलन बनाया।
कुछ नाम पद से नहीं…
अपने काम से पहचाने जाते हैं।


