Thursday, July 9, 2026
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डीबीएस ग्लोबल यूनिवर्सिटी ने किया राष्ट्रीय शिक्षा उत्कृष्टता पुरस्कार 2026 का आयोजन: 500 से अधिक प्रधानाचार्य एकजुट, भारत की अग्रणी एआई यूनिवर्सिटी ने इनोवेशन की नई राह दिखाई

डीबीएस ग्लोबल यूनिवर्सिटी ने किया राष्ट्रीय शिक्षा उत्कृष्टता पुरस्कार 2026 का आयोजन: 500 से अधिक प्रधानाचार्य एकजुट, भारत की अग्रणी एआई यूनिवर्सिटी ने इनोवेशन की नई राह दिखाई

देहरादून, 20 जून 2026: भारत की अग्रणी एआई यूनिवर्सिटी, डीबीएस ग्लोबल यूनिवर्सिटी ने AIPA और NFIS के सहयोग से आज सेलाकुई परिसर में राष्ट्रीय शिक्षा उत्कृष्टता पुरस्कार 2026 एवं प्रिंसिपल कॉन्क्लेव का आयोजन किया। देश भर से 500 से अधिक विद्यालय प्रधानाचार्य, शिक्षाविद् और शैक्षिक प्रशासक इस ऐतिहासिक समारोह में शामिल हुए – और साथ ही अनुभव किया कि कैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) शिक्षा के भविष्य को नया आकार दे रही है।

इस बार समारोह केवल पुरस्कार वितरण तक सीमित नहीं रहा। भारत की अग्रणी एआई विश्वविद्यालय के रूप में अपनी पहचान को और सुदृढ़ करते हुए डीबीएस ग्लोबल यूनिवर्सिटी ने इस राष्ट्रीय कॉन्क्लेव में पहली बार एक विशेष एआई कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यशाला का संचालन डॉ. राघव उपाध्याय ने किया, जिन्होंने प्रतिभागियों को एआई के व्यावहारिक उपयोग – स्मार्ट क्लासरूम, व्यक्तिगत शिक्षण, एआई-सहायता प्राप्त प्रशासन और डेटा-आधारित शैक्षिक नियोजन – से परिचित कराया।

कार्यशाला में प्रधानाचार्यों ने अपने विद्यालयों में एआई उपकरण लागू करने, शिक्षकों को प्रशिक्षित करने और विद्यार्थियों को एआई-युग के लिए तैयार करने को लेकर उत्साहपूर्वक सवाल पूछे। अनेक प्रतिभागियों के लिए यह पहला अवसर था जब उन्होंने एआई को एक व्यावहारिक विद्यालय प्रबंधन उपकरण के रूप में समझा।

डीबीएस ग्लोबल यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. संजय जसोला ने कहा,

“यहाँ उपस्थित प्रधानाचार्य और शिक्षक केवल अध्यापक नहीं – ये राष्ट्र-निर्माता हैं। शिक्षा में एआई का समावेश अब विकल्प नहीं, अनिवार्यता है। यह कार्यशाला हमारी उस प्रतिबद्धता का व्यावहारिक प्रमाण है। हम चाहते हैं कि भारत का हर प्रधानाचार्य एआई को समझे और उसका उपयोग करे – और आज का दिन उस सफर की शुरुआत है।”

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के वरिष्ठ शिक्षाविद् भी उपस्थित रहे, जिनमें प्रो-वाइस चांसलर डॉ. रानी भारद्वाज, डॉ. मनीष प्रताप तथा एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. नवजोत सिंह सहित अन्य विद्याविद् शामिल थे।

और प्रशासनिक अधिकारियों ने उपस्थित प्रधानाचार्यों और अतिथियों के साथ मिलकर इस आयोजन को सफल बनाया।

नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडिपेंडेंट स्कूल्स एवं AIPA के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. नवदीप भारद्वाज ने कहा,

“जब हम एक प्रधानाचार्य को सम्मानित करते हैं, तो हम उन हजारों विद्यार्थियों को सम्मानित करते हैं जिनका जीवन उस प्रधानाचार्य ने बदला है। आज की एआई कार्यशाला ने हम सबको भारतीय शिक्षा के उज्ज्वल भविष्य की एक झलक दिखाई।”

AIPA के राज्य अध्यक्ष डॉ. अमित सहगल ने कहा,

“उत्तराखंड सदा तो ज्ञान की भूमि रही है। यहाँ उपस्थित प्रधानाचार्य लाखों परिवारों की आशाओं के वाहक हैं। हर शिक्षक परिवर्तन को अपनाए और अपने विद्यालयों को आत्मविश्वास के साथ भविष्य की ओर ले जाए।”

समारोह में श्री मोहित अग्रवाल, अध्यक्ष ने कहा,

“शिक्षा वह सबसे शक्तिशाली बुनियादी ढाँचा है जो कोई राष्ट्र बना सकता है। हर सफल संस्थान के पीछे एक समर्पित प्रधानाचार्य होता है जो सैकड़ों बच्चों का भविष्य गढ़ता है। मैं प्रत्येक पुरस्कार विजेता को हृदय से बधाई देता हूँ। इस जैसे आयोजनों को राष्ट्रीय परंपरा बनना चाहिए।”

प्रिंसिपल कॉन्क्लेव में छात्र-केंद्रित शिक्षा, डिजिटल रूपांतरण और समावेशी शिक्षा पर जीवंत चर्चाएँ हुईं। यह कार्यक्रम डीएपी कोऑपरेशन के सहयोग से संपन्न हुआ।

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