Thursday, July 9, 2026
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सुप्रीम कोर्ट की सख्ती: नेशनल हाईवे के किनारे 40 मीटर में मकान, 75 मीटर में ढाबा-होटल पर रोक 

सुप्रीम कोर्ट की सख्ती: नेशनल हाईवे के किनारे 40 मीटर में मकान, 75 मीटर में ढाबा-होटल पर रोक
नई दिल्ली, 24 जून 2026: सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल 2026 में फलोदी एक्सीडेंट मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए नेशनल हाईवे के दोनों तरफ निर्माण पर सख्त पाबंदियां लगा दी हैं। कोर्ट ने हाईवे पर हो रही लगातार दुर्घटनाओं को रोकने के लिए हाईवे सेफ्टी को प्राथमिकता देते हुए यह निर्देश जारी किए हैं।
मुख्य प्रावधान
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, नेशनल हाईवे की मध्य रेखा (Centre Line/Median) से मापी गई दूरी के आधार पर प्रतिबंध इस प्रकार हैं:
40 मीटर (आवासीय): हाईवे की मध्य रेखा से 40 मीटर के अंदर किसी भी प्रकार का आवासीय निर्माण (नया मकान, रिहायशी कॉलोनी आदि) या लैंड यूज चेंज पर पूर्ण रोक।
75 मीटर (व्यावसायिक): मध्य रेखा से 75 मीटर के अंदर कोई भी व्यावसायिक निर्माण (ढाबा, होटल, रेस्टोरेंट, दुकान, मॉल, पेट्रोल पंप आदि) या लैंड यूज चेंज पर सख्त प्रतिबंध।
ये दूरी दोनों तरफ लागू होगी और Indian Roads Congress (IRC) के मानकों के अनुरूप है।
तत्काल प्रभाव
Right of Way (ROW) में किसी भी प्रकार का निर्माण पहले की तरह पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
नई कमर्शियल संरचनाओं (खासकर ढाबा और ईटरी) पर तुरंत प्रतिबंध।
अनधिकृत अतिक्रमणों को 60 दिनों के अंदर हटाने के निर्देश।
मौजूदा निर्माणों पर भी सख्ती से कार्रवाई, खासकर राजस्थान हाईकोर्ट के आदेशों के साथ समन्वय में।
कोर्ट ने सभी राज्य सरकारों को 60 दिनों के अंदर इस संबंध में अधिसूचना जारी करने का निर्देश दिया है। साथ ही NHAI और MoRTH को पूरे देश में एकसमान लागू करने की जिम्मेदारी सौंपी है।
क्यों जरूरी था यह फैसला?
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि देश की कुल सड़कों का सिर्फ 2% हिस्सा नेशनल हाईवे है, लेकिन कुल सड़क दुर्घटनाओं में 30% मौतें इन्हीं पर होती हैं। हाईवे के किनारे अनियोजित निर्माण, ढाबे और अतिक्रमण दृश्यता कम करते हैं और दुर्घटनाओं का बड़ा कारण बनते हैं।
नोट: दूरी सड़क के किनारे (edge) से नहीं, बल्कि मध्य बिंदु (Centre Line) से मापी जाएगी। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में थोड़ा अंतर हो सकता है, लेकिन कोर्ट की यह डायरेक्टिव पूरे देश में लागू होगी।
क्या करें प्रभावित लोग?
किसी भी प्लॉट पर निर्माण से पहले स्थानीय NHAI, PWD या संबंधित अधिकारियों से NOC (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) जरूर लें।
हाईवे चौड़ीकरण या विशेष अधिसूचनाओं के कारण प्रभावित प्लॉट की जानकारी के लिए आधिकारिक सर्वे करवाएं।
नवीनतम अपडेट के लिए सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट या NHAI की आधिकारिक वेबसाइट चेक करें।
यह फैसला हाईवे को सुरक्षित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। हालांकि कई राज्यों में निर्माण व्यवसाय से जुड़े लोग और स्थानीय प्रशासन इस पर चिंता जता रहे हैं।
अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक दस्तावेज़ देखें। निर्माण योजनाएं बनाने से पहले कानूनी सलाह और सरकारी मंजूरी लेना अनिवार्य है।

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