सेलाकुई में हड़ताल का माहौल: पांच कंपनियों के सैकड़ों मजदूर सड़कों पर, सैलरी बढ़ाने की मांग
देहरादून (सेलाकुई): उत्तराखंड के सेलाकुई इंडस्ट्रियल एरिया में शुक्रवार को बड़ा मजदूर आंदोलन देखने को मिला। पांच प्रमुख कंपनियों के सैकड़ों मजदूर सैलरी वृद्धि और बेहतर कामकाजी परिस्थितियों की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने ट्रैफिक जाम कर दिया और कंपनी प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की।
मुख्य रूप से डिक्सन टेक्नोलॉजी की तीन ब्रांचों और बिंडलास फार्मा समेत अन्य इकाइयों में मजदूरों ने खुलकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि लंबे समय से उनकी मांगों को नजरअंदाज किया जा रहा है। न्यूनतम मजदूरी, ओवरटाइम भुगतान, साप्ताहिक छुट्टियों और अन्य सुविधाओं को लेकर गंभीर अनियमितताएं बरती जा रही हैं।1eab85
डिक्सन टेक्नोलॉजी पर सबसे गंभीर आरोप
प्रदर्शनकारियों और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, डिक्सन टेक्नोलॉजी पर सबसे ज्यादा अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। मजदूरों का कहना है कि कंपनी में वेतन संरचना में हेराफेरी, पीएफ और अन्य कटौतियों में गड़बड़ी तथा काम के घंटों से अधिक काम करवाए जाने जैसे मामले आम हैं।
एक मजदूर नेता ने बताया, “हम सालों से शोषण सह रहे हैं। सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी भी नहीं दी जा रही। अगर सैलरी नहीं बढ़ाई गई तो हम अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।”
सूत्रों का दावा है कि यदि संबंधित विभागों द्वारा इन आरोपों की निष्पक्ष जांच हुई और रिश्वतखोरी की आंच नहीं पड़ी, तो डिक्सन कंपनी पर करोड़ों रुपये का जुर्माना लग सकता है। लेबर विभाग और अन्य एजेंसियां अब मामले की जांच में जुट गई हैं।
बिंडलास फार्मा में भी विरोध
बिंडलास फार्मा में भी मजदूरों ने खुलकर विरोध जताया। यहां भी सैलरी वृद्धि, स्वास्थ्य बीमा और सुरक्षित कार्य वातावरण की मांग प्रमुख रही। ED (संभवतः Enforcement Directorate या संबंधित निरीक्षण टीम) की टीम भी मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया।
प्रशासन की भूमिका
सेलाकुई थाना पुलिस और जिला प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भारी बल तैनात किया। एसडीएम स्तर के अधिकारी मजदूर प्रतिनिधियों से बातचीत कर रहे हैं। कंपनी प्रबंधन ने फिलहाल कोई आधिकारिक बयान नहीं जारी किया है, लेकिन सूत्र बताते हैं कि बातचीत जारी है।
मजदूर यूनियनों ने चेतावनी दी है कि अगर 48 घंटे के अंदर मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
यह घटना उत्तराखंड में औद्योगिक क्षेत्रों में मजदूरों की बढ़ती असंतोष को उजागर करती है। स्थानीय उद्योगपतियों का कहना है कि ऐसे आंदोलन निवेश के माहौल को प्रभावित कर सकते हैं, जबकि मजदूर संगठन न्याय की बात कर रहे हैं।
अपडेट: मामले पर नजर रखी जा रही है। लेबर कमिश्नर की टीम जल्द ही कंपनियों का निरीक्षण करेगी।


