- देहरादून के दून अस्पताल (Government Doon Medical College Hospital), जो उत्तराखंड का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है, में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। प्राचार्य की नियुक्ति के बावजूद हालात सुधारने के बजाय और खराब हो गए हैं, जिससे रोजाना आने वाले मरीजों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
प्रमुख समस्याएं
डॉक्टरों की अनुपलब्धता: डॉक्टर समय पर उपलब्ध नहीं होते, जिससे ओपीडी और इमरजेंसी में लंबी कतारें लगती हैं।
दवाइयों की कमी: अस्पताल में बुनियादी और जरूरी दवाइयां अक्सर नहीं मिलतीं, मरीजों को बाहर से खरीदनी पड़ती हैं।
पर्ची, जांच और आभा (ABHA) व्यवस्था में अव्यवस्था: पर्ची कटवाने से लेकर जांच रिपोर्ट तक सब कुछ अव्यवस्थित है। गंभीर मरीजों को आभा से जुड़ी समस्याओं के कारण घंटों इंतजार करना पड़ता है, जिससे उनकी जान को खतरा मंडराता है।
प्रशासनिक लापरवाही: अस्पताल प्रशासन और विभागीय अधिकारियों की निगरानी की कमी से ये समस्याएं बढ़ रही हैं। स्वास्थ्य विभाग के सचिव डॉ. आर. राजेश और राज्य सरकार के प्रयासों को भी विभाग के ही कुछ अधिकारी विफल करते नजर आते हैं।
ये मुद्दे न केवल प्रशासनिक हैं, बल्कि आम जनता के स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर संकट बन चुके हैं। उत्तराखंड में सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी (करीब 45-57% पद खाली) और संसाधनों की कमी एक लंबे समय से चली आ रही समस्या है, जो दून अस्पताल जैसी प्रमुख संस्था को भी प्रभावित कर रही है।
संगठन की चेतावनी
राष्ट्रवादी युवक कांग्रेस (एनसीपी) के उत्तराखंड प्रदेश समन्वयक सौरभ आहूजा ने इस स्थिति पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि यदि जल्द ही दून अस्पताल में सभी व्यवस्थाओं में सुधार नहीं किया गया और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो संगठन जनहित में बड़ा आंदोलन शुरू करने से पीछे नहीं हटेगा। सौरभ आहूजा ने पहले भी कोरोनेशन और दून अस्पताल की अव्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य सचिव को पत्र लिखकर मुद्दा उठाया था।
राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग को तत्काल कदम उठाने की जरूरत है, ताकि गरीब और आम मरीजों को बेहतर इलाज मिल सके। दून अस्पताल उत्तराखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था का चेहरा है, और इसकी बदहाली पूरे राज्य के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।


