नई दिल्ली : मुख्य न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने बुधवार को मौखिक रूप से कहा कि माइनिंग को पूरी तरह बैन करने के बजाय प्रैक्टिकल नजरिए से देखना चाहिए. उन्होंने कहा, “अगर आप सब कुछ बैन कर देंगे, तो आम आदमी अपना घर कहां से बनाएगा.?”
सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐसे समग्र फ्रेमवर्क को विकसित करने का संकेत दिया, जो रेगुलेटेड माइनिंग की संभावना पर विचार करे, परंतु उसके साथ ही उन निवारक रेगुलेटरी उपायों की भी रूपरेखा बताए जिन्हें अगर ऐसी गतिविधि की अनुमति दी जाती है, तो अधिकारियों को उसे लागू करना होगा. उन्होंने कहा, “अगर अनुमति दी जाती है तो अथॉरिटी द्वारा कौन से रेगुलेटरी निवारक उपाय अपनाए जाने चाहिए. उसे लागू करने का मैकेनिज्म क्या होना चाहिए.”
सीजेआई की अध्यक्षता वाली और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और विपुल एम पंचोली की बेंच 1995 की पेंडिंग पीआईएल जिसका टाइटल ‘इन रे: टीएन गोदावरमन थिरुमुलपाद’ है. इस मामले में दायर अंतरिम आवेदनों पर सुनवाई कर रही थी.
सुनवाई के दौरान, एक वकील ने कोर्ट का ध्यान एक अवमानना याचिका की ओर दिलाया और जोर देकर कहा कि यह उस माइनिंग के बारे में है जो असम वेटलैंड कंजर्वेशन रिजर्व के 10 किलोमीटर के दायरे में हो रही है, जिसे सुप्रीम कोर्ट के आदेशों से पूरी तरह बैन कर दिया गया है.
सीजेआई ने पूछा, “एक देश के तौर पर माइनिंग के लिए देश को कहां जाना चाहिए?” वकील ने 10 किलोमीटर के दायरे पर जोर दिया. सीजेआई ने मौखिक रूप से कहा, “क्या हवा में माइनिंग संभव है? हर चीज को इस तरह पेश करना सही नहीं है, हम जानते हैं कि ये सभी एप्लीकेशन क्यों हैं. इस बारे में सोचते हैं. अगर आप सब कुछ बैन कर देंगे, तो आम आदमी अपना घर कहां से बनाएगा.”
CJI ने पूछा, “सड़कें बनाने के लिए कच्चा माल कहां से आएगा. हमें एक पूरी योजना दें जहां रेगुलेटेड माइनिंग, अगर जरूरी हो, तो उसकी इजाजत दी जा सके. अगर इजाजत दी जाती है, तो अथॉरिटी को कौन से रेगुलेटरी रोकथाम के उपाय अपनाने चाहिए. इसे लागू करने का क्या मैकेनिज्म होना चाहिए.”
एक और वकील ने कहा कि यह अवमानना उन लोगों के प्रॉक्सी द्वारा दायर की गई है, जो कभी नहीं चाहते कि कानूनी माइनिंग शुरू हो और इस बात पर जोर दिया कि सालों से कानूनी माइनिंग बंद है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उत्तराखंड में एक कंजर्वेशन रिजर्व है, पार्क या वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी नहीं, बल्कि एक इंसान द्वारा बनाया गया कंजर्वेशन रिजर्व है. उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में माइनिंग बंद हो गई है, और आगे कहा, “आपके लॉर्डशिप ने कई फैसलों में कहा है कि नेशनल पार्क और वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी को बहुत ज़्यादा सुरक्षा मिलती है.”
वकील ने तर्क दिया कि कंजर्वेशन रिजर्व को कंजर्वेशन रिजर्व के बाहर बफर जोन की भी जरूरत नहीं होती है और नेशनल पार्क को इको-सेंसिटिव जोन या बफर जोन की जरूरत होती है. सीजेआई ने वकील से पूछा, क्या हिमाचल प्रदेश में माइनिंग बंद हो गई है? और आप किस इलाके में माइनिंग कर रहे हैं? वकील ने जवाब दिया कि यह हिमाचलप्रदेश में पोंटा साहिब के पास है. एक और वकील ने कहा कि सिर्फ असम के लिए इस कोर्ट के आदेशों से यह 10 किमी है, और दूसरों के लिए यह एक किमी है.


