प्रेम नगर-पांवटा हाईवे अब ‘यमराज का अड्डा’ बनता जा रहा है – अधूरे रोड पर टोल, अंधेरा और रोज़ दुर्घटनाएं
देहरादून (उत्तराखंड) से पांवटा साहिब (हिमाचल प्रदेश) तक जा रहे नए अपग्रेडेड NH-07 हाईवे पर पिछले कुछ महीनों में स्थिति बेहद चिंताजनक हो गई है। प्रेम नगर क्षेत्र से पांवटा तक का यह महत्वपूर्ण कॉरिडोर अभी पूरी तरह पूरा नहीं हुआ है, लेकिन टोल वसूली शुरू हो चुकी है। अधूरे हिस्सों में स्ट्रीट लाइट्स की कमी, निर्माण कार्य के बोर्ड न लगने और तेज रफ्तार वाहनों के कारण रोज़ाना दुर्घटनाएं हो रही हैं।
रविवार रात करीब 2 बजे एक कार अनियंत्रित होकर बीच सड़क पर पलट गई, जिससे वाहन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। यह कोई इकलौता हादसा नहीं है – स्थानीय लोगों के अनुसार, इस हाईवे पर लगभग रोज़ ऐसी घटनाएं हो रही हैं। प्रेम नगर में फ्लाईओवर का निर्माण चल रहा है, जबकि कुल्हाल से पांवटा की ओर हिमाचल साइड पर रैंप और पुल का काम अधूरा है। रात में अंधेरा होने से ड्राइवरों को रास्ता दिखाई नहीं देता, जिससे वाहन पलटने या टकराने की घटनाएं बढ़ गई हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि अधूरे हाईवे पर टोल क्यों वसूला जा रहा है? जनवरी 2026 से धर्मावाला टोल प्लाजा पर टोल शुरू हो गया है (प्राइवेट कार के लिए एक तरफ का टोल ₹65)। NHAI के अनुसार, टोल केवल पूरे हुए हिस्से के लिए लिया जा रहा है, लेकिन राहगीर इसे पूरा हाईवे समझकर तेज गति से वाहन चलाते हैं। इससे दुर्घटनाओं में इजाफा हुआ है। निर्माण स्थलों पर साइनेज बोर्ड, रिफ्लेक्टिव मार्किंग या लाइटिंग की कमी से हाईवे कंपनी की लापरवाही साफ झलकती है।
यह धोखा यात्रियों के साथ हो रहा है – टोल देने के बाद लोग सोचते हैं कि रोड सुरक्षित और पूरा है, लेकिन हकीकत में निर्माण कार्य जारी है, जो जानलेवा साबित हो रहा है।
स्थानीय लोगों की मांगें:
अधूरे हिस्सों पर तुरंत टोल वसूली बंद की जाए।
रात में स्ट्रीट लाइट्स की व्यवस्था की जाए।
निर्माण क्षेत्रों पर स्पष्ट वार्निंग बोर्ड और बैरिकेडिंग लगाए जाएं।
हाईवे कंपनी (NHAI और संबंधित ठेकेदार) पर सख्त कार्रवाई हो, ताकि लोगों की जान से खिलवाड़ बंद हो।
क्या प्रशासन और NHAI अब भी चुप रहेंगे? हर दुर्घटना के बाद सिर्फ मुआवजे की बातें होती हैं, लेकिन जिम्मेदारी किसकी? यह सवाल हर उस परिवार से पूछा जाना चाहिए जिसने इस हाईवे पर अपनों को खोया है।


