Friday, April 17, 2026
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विशेष ब्रेकिंग: मिनिस्ट्री ऑफ एनवायरनमेंट, फॉरेस्ट एंड क्लाइमेट चेंज ने उत्तराखंड के आसान कंजर्वेशन रिजर्व के पास खनन पट्टों के प्रस्तावों को किया निरस्त आसान कंजर्वेशन रिजर्व के पास NBWL की मंजूरी न मिलने से दो खनन पट्टे निरस्त

विशेष ब्रेकिंग: मिनिस्ट्री ऑफ एनवायरनमेंट, फॉरेस्ट एंड क्लाइमेट चेंज ने उत्तराखंड के आसान कंजर्वेशन रिजर्व के पास खनन पट्टों के प्रस्तावों को किया निरस्त
आसान कंजर्वेशन रिजर्व के पास NBWL की मंजूरी न मिलने से दो खनन पट्टे निरस्त

(Protected Area) के 1 किमी के भीतर खनन पूरी तरह प्रतिबंधित है। दूसरा उत्तराखंड हाई कोर्ट के 2015 के आदेश और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, आसान रिजर्व के 10 किमी के भीतर किसी भी नई लीज के लिए वाइल्डलाइफ क्लियरेंस अनिवार्य है।
मंत्रालय ने पाया कि उत्तराखंड सरकार द्वारा भेजे गए खनन पट्टों की फाइलों में आसान कंजर्वेशन रिजर्व की 1 किमी की इको-सेंसिटिव जोन (ESZ) की सीमा के भीतर आ रही थी। वन्यजीवों और पारिस्थितिकी संतुलन के लिए इस क्षेत्र में खनन गतिविधियों को “खतरनाक” (Hazardous) माना गया है।
NBWL की भूमिका: नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ (NBWL) की स्थायी समिति ने की सिफारिश के लिए राज्य सरकार द्वारा भेजे गए खनन पट्टों को लेकर कड़ी इन फाइलों को मंत्रालय ने इसी आधार पर रद्द कर दिया है। मिनिस्ट्री ऑफ एनवायरनमेंट, फॉरेस्ट एंड क्लाइमेट चेंज (MoEFCC) ने उत्तराखंड के आसान कंजर्वेशन रिजर्व के पास खनन पट्टों (Mining Leases) के प्रस्तावों को निरस्त (Reject) कर दिया है। यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के उस सख्त आदेश के है कि अपने इको-सेंसिटिव जोन (ESZ) के दायरे को NTCA अनुपालन में लिया गया है, जिसमें संरक्षित क्षेत्रों (Protected Areas) की सलाह (National Tiger Conservation Authority) की सलाह पर प्रतिबंध लगाया गया है।
सुप्रीम कोर्ट और समिति के आदेश का मुख्य आधार: प्रस्तावों की अस्वीकृति नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ (NBWL) की समिति ने 28 अप्रैल 2023 और उसके बाद के अब यह सवाल यह उठता है कि क्या उत्तराखंड सरकार में बैठे विभिन्न आदेशों को आधार मानते हुए उन खनन प्रस्तावों को रद्द उन जिम्मेदार अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट की रूलिंग की कर दिया है। जो की देहरादून के ढालिपुर में आसान कंजर्वेशन जानकारी नहीं थी कि यह 1 किलोमीटर का एरिया बफर जोन रिजर्व की सीमा के बहुत करीब थे। विशेष रूप से प्रस्ताव संख्या में आता है जो संरक्षित विभागों में बैठे अधिकारियों ने उत्तराखंड WL/UK/MIN/QRY/534889/2025 (~91 मीटर) और सरकार की ओर से माइनिंग लीज की इन फाइलों को NBWL WL/UK/MIN/QRY/534906/2025 (~138 मीटर) को के लिए इन प्रस्तावों को रिजेक्ट किया। क्या ऐसे अधिकारियों को पारिस्थितिक जोखिम के कारण खारिज किया गया है।
एक किमी का बफर जोन: सुप्रीम कोर्ट की 3 जजों की बेंच जो सरकार की फजीहत करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ते (जिसमें जस्टिस बी.आर. गवई शामिल थे) ने नवंबर 2025 में अब यह उनका निजी स्वार्थ है या अज्ञानता?
यह स्पष्ट किया कि देश के किसी भी संरक्षित क्षेत्र…

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