पछवाड़ून (विकासनगर) में भू-माफिया का खुला खेल: गोल्डन फॉरेस्ट और सरकारी खाले की भूमि पर अवैध प्लाटिंग, विभागों पर सवालों के घेरे
देहरादून/विकासनगर, 12 अप्रैल 2026
मुख्य चकराता मार्ग ढाकी पर स्थित पछवाड़ून इलाके में भू-माफियाओं का बोलबाला छाया हुआ है। सूत्रों के अनुसार, कृषि भूमि पर बिना किसी अनुमति के अवैध प्लाटिंग कर दी गई है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस प्लाटिंग में ज्यादातर भूमि गोल्डन फॉरेस्ट और सरकारी खाले की मिली-जुली बताई जा रही है, जिस पर भू-माफियाओं ने कब्जा कर लिया।
भू-माफियाओं ने न तो मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA) से कोई स्वीकृति ली और न ही रेरा से अनुमति। इसके बावजूद पिछले कई महीनों से मुख्य मार्ग पर खुलेआम प्लाटिंग चल रही है। सूत्र बताते हैं कि अधिकांश प्लॉट बिक भी चुके हैं। भू-माफिया ने आलीशान गेट लगाकर अपनी ताकत का प्रदर्शन कर दिया है, जो जिम्मेदार विभागों के लिए तमाचा साबित हो रहा है।
बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है – विकासनगर तहसील के रजिस्ट्रार कार्यालय ने सरकारी और गोल्डन फॉरेस्ट की भूमि की रजिस्ट्री किस आधार पर कर दी? सफेदपोश आकाओं के संरक्षण में यह अवैध कब्जा और प्लाटिंग कैसे दिन-दहाड़े चल रही है? आम जनमानस पूछ रहा है कि आखिर तहसील विकासनगर और MDDA विभाग क्यों मौन साधे बैठे हैं? क्या जिम्मेदार अधिकारी रसमलाई खाकर डकार मार रहे हैं और अपना हिस्सा ले चुके हैं?
MDDA का ‘पीला पंजा’ (जिसे अवैध प्लाटिंग रोकने के लिए जाना जाता है) इस बार मुख्य मार्ग पर चल रहे अवैध कार्य तक क्यों नहीं पहुंचा? जबकि विकासनगर में MDDA ने कई बार अवैध प्लाटिंग पर बुलडोजर चलाए हैं, लेकिन इस मामले में अब तक कोई कार्रवाई नजर नहीं आई।
स्थानीय लोग और सूत्रों का कहना है कि यह पूरा मामला भू-माफिया और कुछ अधिकारियों की मिलीभगत का नतीजा लगता है। गोल्डन फॉरेस्ट से जुड़ी भूमि पहले से ही विवादित रही है और ऐसे में बिना अनुमति के प्लाटिंग व रजिस्ट्री आम जनता के हितों पर सीधा हमला है।
आम जनमानस का सवाल जिम्मेदार विभागों से:
विकासनगर तहसील रजिस्ट्रार ने सरकारी भूमि की रजिस्ट्री किस कानूनी प्रावधान के तहत की?
MDDA और RERA की अनुमति के बिना प्लाट बिक रहे हैं तो विभाग कहां सो रहा है?
मुख्य चकराता मार्ग पर महीनों से चल रही अवैध गतिविधि पर अब तक एक्शन क्यों नहीं?
यह मामला न सिर्फ एक स्थानीय घटना है, बल्कि पूरे क्षेत्र में भू-माफिया की मनमानी का प्रतीक बन गया है। अब देखना होगा कि जिम्मेदार विभाग इस पर संज्ञान लेते हैं या फिर फिर से ‘मौन’ ही उनका जवाब रहेगा।


