बॉलीवुड फिल्म ‘उत्तराखंड यमुना डायरी’ से यमुना नदी की दर्द भरी कहानी पर देशभर में सनसनी0ac153
देहरादून (उत्तराखंड): उत्तराखंड के जनपद देहरादून की तहसील विकासनगर में यमुना नदी के किनारे हो रहे अवैध खनन, प्रदूषण और पर्यावरणीय दोहन को लेकर बॉलीवुड फिल्म निर्माता-निर्देशक सनोज मिश्रा की नई फिल्म ‘उत्तराखंड यमुना डायरी’ अब चर्चा का विषय बन गई है। फिल्म का पोस्टर रातोंरात वायरल हो गया है और इससे जुड़े मुद्दे एक बार फिर सुर्खियों में आ गए हैं।
सनोज मिश्रा, जिनकी हालिया फिल्म ‘द डायरी ऑफ मणिपुर’ ने उत्तराखंड की वादियों में शूटिंग के दौरान खासी चर्चा बटोरी, ने मीडिया से बातचीत में यमुना नदी की दयनीय स्थिति पर गहरा दुख जताया। उन्होंने बताया कि फिल्म की शूटिंग के दौरान उन्होंने यमुना की नटखट धारा को पर्वतों से निकलकर कल-कल बहते हुए देखा, लेकिन विकासनगर के हरिपुर बाढ़वाला से लेकर कुल्हाल बॉर्डर तक नदी के दोनों किनारों पर भारी मशीनी खनन चल रहा है।
यमुना पर क्या हो रहा है?
अवैध मशीनी खनन: पोकलेन, जेसीबी और ट्रैक्टर-टमटम मशीनों से नदी तट पर बेतरतीब गड्ढे खोदे जा रहे हैं। मुख्य जलधारा प्रभावित हो रही है।
स्टोन क्रशर: ढकरानी गांव में यमुना किनारे दर्जनों स्टोन क्रशर नियमों की अनदेखी करते हुए चल रहे हैं।
प्रदूषण: यमुनोत्री से लेकर अंतिम सीमा तक होटलों, नगर निगमों, नगर पालिकाओं और ग्राम पंचायतों द्वारा गंदा पानी और कूड़ा सीधे नदी में बहाया जा रहा है।
प्रतिबंधों की अनदेखी: हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट और NGT के प्रतिबंधों के बावजूद धरातल पर स्थिति अलग है।
सनोज मिश्रा ने खुलकर कहा कि प्रशासन, सत्ताधारी और सफेदपोश लोगों का संरक्षण मिलने से यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा है। फिल्म के माध्यम से वे पूरे देश को यमुना की अविरल धारा और पर्यावरण संरक्षण के लिए जागरूक करने का प्रयास कर रहे हैं।
विकासनगर क्यों सुर्खियों में?
विकासनगर क्षेत्र लंबे समय से अवैध रेत-बजरी खनन के लिए कुख्यात रहा है। यमुना नदी में इन-स्ट्रीम माइनिंग, अस्थायी पुल और पर्यावरण मानदंडों के उल्लंघन की कई पुरानी शिकायतें और रिपोर्ट्स उपलब्ध हैं। फिल्म निर्माता के अनुसार, अब यह मुद्दा इतना गंभीर हो चुका है कि बॉलीवुड के जरिए देश-विदेश के पटल पर इसे उठाया जा रहा है, ताकि प्रशासन की आंखें खुलें और नदी का दोहन रुके।1a706b
फिल्म ‘उत्तराखंड यमुना डायरी’ का निर्माण इस ज्वलंत पर्यावरणीय मुद्दे पर जन-जागरण का माध्यम बनेगा। सनोज मिश्रा की पिछली फिल्मों की तरह यह भी सामाजिक सरोकारों से जुड़ी होगी।
प्रशासन पर सवाल: कुंभकर्णी नींद सोए प्रशासन कब जागेगा? क्या फिल्म की वजह से अब यमुना बचाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे? स्थानीय लोग और पर्यावरण प्रेमी इस फिल्म से काफी उम्मीदें लगाए हुए हैं।
यह मुद्दा न सिर्फ उत्तराखंड बल्कि पूरे उत्तर भारत की नदियों के लिए चेतावनी है। यमुना जैसी पवित्र और जीवनदायिनी नदी को बचाना हम सभी की जिम्मेदारी है।


