- उत्तराखंड खनन विभाग ने रचा इतिहास: तकनीक और पारदर्शिता के दम पर ‘C’ श्रेणी में देश में टॉप, राजस्व 1,217 करोड़ के पार
देहरादून: उत्तराखंड के भूतत्व एवं खनिकर्म निदेशालय (खनन विभाग) ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। राज्य खनन तत्परता सूचकांक (State Mining Readiness Index) में ‘C’ श्रेणी में प्रथम स्थान प्राप्त करके विभाग ने न केवल अपनी छवि बदली है, बल्कि पूरे देश के लिए एक मॉडल भी प्रस्तुत किया है। पारदर्शी नीतियों, अवैध खनन पर सख्ती, डिजिटलीकरण और वैज्ञानिक खनन के माध्यम से विभाग ने यह मुकाम हासिल किया।
डिजिटल क्रांति: अवैध खनन पर लगाम
विभाग की सबसे बड़ी सफलता आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल में रही है। माइनिंग डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन एंड सर्विलांस सिस्टम (MDTSS) के तहत खनन गतिविधियों और खनिज परिवहन की实-time निगरानी की जा रही है।
इसके अलावा पूरे राज्य में 45 अत्याधुनिक ई-चेक गेट स्थापित किए गए हैं, जिनमें ANPR (ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन) कैमरे, RFID टैग और हाई-टेक सर्विलांस सिस्टम लगे हैं। इन गेट्स ने अवैध खनन और चोरी के रैकेट पर प्रभावी अंकुश लगाया है।
फर्जी दस्तावेजों को रोकने के लिए सुरक्षित ई-रवन्ना (ई-वे बिल) प्रणाली लागू की गई है, जिसमें मजबूत सुरक्षा फीचर्स दिए गए हैं। इन उपायों से न केवल अवैध गतिविधियां घटी हैं, बल्कि वैध खनन कारोबार को भी बढ़ावा मिला है।
वैज्ञानिक खनन और अन्वेषण कार्य
विभाग ने पारंपरिक खनन की जगह वैज्ञानिक तरीके अपनाए हैं। भूवैज्ञानिकों की टीम लगातार देहरादून, टिहरी, उत्तरकाशी, पिथौरागढ़ और बागेश्वर जैसे जिलों में सोपस्टोन, मैग्नेसाइट, चूना पत्थर और सिलिका सैंड के नए ब्लॉकों की खोज कर रही है। इससे भविष्य में नए खनन क्षेत्र विकसित होने की राह खुली है।
नीतिगत सुधारों का कमाल
विभाग ने व्यावसायिक श्रेणी में पंजीकृत ट्रैक्टर्स को आसानी से अनुमति देने और ई-निविदा व ई-नीलामी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया। इससे favoritism और भ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म हुई।
इन सुधारों को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली और विभाग को प्रतिष्ठित SKOCH Gold Award से सम्मानित किया गया।
आर्थिक उछाल: 1,217 करोड़ का रिकॉर्ड राजस्व
इन प्रयासों का सबसे ठोस परिणाम वित्तीय वर्ष 2025-26 में दिखा। विभाग ने अपना लक्ष्य पार करते हुए 1,217 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड राजस्व अर्जित किया। केंद्र सरकार ने भी खनन सुधारों में बेहतरीन प्रदर्शन के लिए उत्तराखंड को 100 से 200 करोड़ रुपये का विशेष प्रोत्साहन दिया।
पर्यावरण और सामाजिक जिम्मेदारी
खनन को केवल राजस्व का साधन न मानकर विभाग ने पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दी। जिला खनिज फाउंडेशन न्यास (DMF) के माध्यम से खनन प्रभावित क्षेत्रों में स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र, पानी और सड़क जैसी सुविधाओं पर खर्च किया जा रहा है।
इसके अलावा पुल, सड़क और भवन निर्माण से पहले भूगर्भीय जांच कराई जा रही है तथा भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में तकनीकी सलाह दी जा रही है।
विभाग के अधिकारियों का कहना
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “हमारा फोकस ‘सस्टेनेबल माइनिंग’ पर है। पारदर्शिता, तकनीक और पर्यावरण सुरक्षा के संतुलन से हमने यह उपलब्धि हासिल की है। यह उत्तराखंड के लिए नई शुरुआत है।”
निष्कर्ष:
उत्तराखंड खनन विभाग का यह सफर दिखाता है कि सही नीतियों, आधुनिक तकनीक और सख्त निगरानी से न सिर्फ अवैध खनन रोका जा सकता है, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है। यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकता है।


