Tuesday, June 2, 2026
spot_img
Homeउत्तराखंडपछवादू न की नदियाँ कूड़े की भेंट चढ़ रही हैं: हाई कोर्ट...

पछवादू न की नदियाँ कूड़े की भेंट चढ़ रही हैं: हाई कोर्ट के आदेशों की खुली अवहेलना

  1. पछवादू न की नदियाँ कूड़े की भेंट चढ़ रही हैं: हाई कोर्ट के आदेशों की खुली अवहेलना
  2. देहरादून/पछवादून। ग्राम पंचायतों द्वारा नदियों में कूड़ा डालने की घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं। जिम्मेदार विभाग और पंचायतें हाई कोर्ट के स्पष्ट आदेशों को लगातार ठुकरा रही हैं। ताजा मामला ग्राम पंचायत छरबा का है, जहाँ पूरी ग्राम सभा का कूड़ा शीतला नदी में डाला जा रहा है। इससे नदी बुरी तरह प्रदूषित हो रही है और आसपास का वातावरण दूषित हो गया है।
  3. समस्या की गंभीरता
  4. शीतला नदी में कूड़े के ढेर लग गए हैं। टचिंग ग्राउंड शीशमबाड़ा की तरह दुर्गंध उठ रही है।
  5. कूड़ा खाकर मवेशी और गोवंश बीमार पड़ रहे हैं।
  6. आसपास की आबादी का जीना मुश्किल हो गया है — सांस लेना भी दूभर।
  7. यह कोई एक जगह की समस्या नहीं है। यमुना, शीतला, आसन, स्वर्णा समेत क्षेत्र की अधिकांश नदियाँ कूड़े के अंबार में तब्दील हो चुकी हैं।
  8. ग्राम प्रधान और पंचायतें लोगों से कूड़ा कलेक्शन के नाम पर शुल्क वसूलती हैं। कूड़ा कलेक्शन वाहन भी चलाए जाते हैं, लेकिन कूड़े का निपटान नदियों में किया जा रहा है। यह दोहरी मार है — पैसे भी लिए, प्रदूषण भी फैलाया।
  9. हाई कोर्ट के आदेशों की अवहेलना
  10. उत्तराखंड हाई कोर्ट और राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (NGT) ने कई बार स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि नदियों के किनारे या उनमें कूड़ा न डाला जाए। नदी प्रदूषण करने वालों पर संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज करने के आदेश हैं।
  11. फिर भी जमीनी हकीकत कुछ और है। पंचायतें और संबंधित विभाग आँखें मूंदे बैठे हैं।
  12. प्रभावित क्षेत्र
  13. पछवाडून की अधिकांश ग्राम पंचायतें।
  14. छरबा ग्राम पंचायत (शीतला नदी)।
  15. यमुना, आसन, स्वर्णा आदि नदियाँ।
  16. शीशमबाड़ा जैसे स्थानों पर पहले से ही कूड़े के प्रसंस्करण संयंत्रों की समस्या चर्चित रही है, जहाँ प्रबंधन की कमी से दुर्गंध और प्रदूषण बढ़ा है।
  17. अब क्या?
  18. खबर प्रकाशित होने के बाद देखना होगा कि जिम्मेदार विभाग — जिला प्रशासन, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, पंचायती राज विभाग और संबंधित ग्राम पंचायतें — कोई ठोस कार्रवाई करती हैं या फिर हाई कोर्ट के आदेशों को और दिनों तक ठुकराती रहेंगी।
  19. नदियाँ हमारी जीवन रेखा हैं। इन्हें कूड़े का डंपिंग यार्ड बनाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। स्थानीय निवासियों, पर्यावरण कार्यकर्ताओं और मीडिया को इस मुद्दे पर लगातार नजर रखनी होगी ताकि दोषियों पर कार्रवाई हो और नदियाँ बच सकें।
  20. जिम्मेदार विभाग बने धृतराष्ट्र बनकर आँखें न फेरें। समय आ गया है सख्ती से कार्रवाई का।
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments