बेंगलुरु, 19 जुलाई 2026 — दुर्लभ पृथ्वी (रेयर अर्थ) चुंबकों पर चीन की निर्भरता को चुनौती देते हुए, बेंगलुरु के डीप-टेक स्टार्टअप विमैग लैब्स (Vimag Labs) ने बिना किसी स्थायी चुंबक वाली इलेक्ट्रिक मोटर का सफल विकास किया है। कंपनी को इस तकनीक के लिए पांचवां भारतीय पेटेंट मिल चुका है, जो सॉफ्टवेयर, एडवांस पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और प्रोप्राइटरी एल्गोरिदम की मदद से चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करती है।
पारंपरिक मोटर से अलग क्या है?
पारंपरिक परमानेंट मैग्नेट सिंक्रोनस मोटर (PMSM) में रेयर अर्थ मैग्नेट्स का इस्तेमाल होता है, जिनका उत्पादन मुख्य रूप से चीन नियंत्रित करता है। विमैग की वर्चुअल मैग्नेट सिंक्रोनस मोटर (VMSM) इन चुंबकों को पूरी तरह हटा देती है। इसके बजाय, यह रोटर में चुंबकीय क्षेत्र को रीयल-टाइम में सॉफ्टवेयर और पावर इलेक्ट्रॉनिक्स के जरिए उत्पन्न और नियंत्रित करती है। मोटर ब्रशलेस और स्लिप-रिंग-फ्री डिजाइन वाली है, जो प्रदर्शन में पारंपरिक मोटर के बराबर या बेहतर बताई जा रही है।df4a4e
कंपनी के सह-संस्थापक और सीईओ मनीष सेठ ने कहा, “यह पेटेंट 87,600 से ज्यादा इंजीनियरिंग घंटों की मेहनत का नतीजा है। यह हमारी कमर्शियल रोडमैप को मजबूत करेगा।” कंपनी का दावा है कि यह तकनीक लागत, सप्लाई चेन जोखिम और भू-राजनीतिक निर्भरता को कम करेगी।
भारत के लिए बड़ा अवसर
भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती मांग के बीच यह तकनीक स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देगी। मोटर मुख्य रूप से कॉपर, स्टील और स्टैंडर्ड इलेक्ट्रॉनिक्स से बनेगी, जिससे आयात पर निर्भरता घटेगी। विमैग लैब्स वर्तमान में टू-व्हीलर और पैसेंजर वाहन निर्माताओं के साथ पायलट प्रोजेक्ट चला रही है। भविष्य में लाइट कमर्शियल वाहन, कमर्शियल वाहन, 200-600 kW इंडस्ट्रियल सिस्टम, रोबोटिक्स, डिफेंस और कूलिंग सिस्टम में इसका विस्तार किया जाएगा।699d87
कंपनी ने हाल ही में Accel के नेतृत्व में 5 मिलियन डॉलर (लगभग 42 करोड़ रुपये) की सीरीज A फंडिंग हासिल की है, जिसमें Chakra Growth Fund और Thinkuvate ने भी हिस्सा लिया। साथ ही, मैन्युफैक्चरिंग स्केल-अप के लिए Jendamark India के साथ MoU साइन किया गया है।
संभावनाएं और चुनौतियां
यदि आगे के परीक्षण और व्यावसायिक उत्पादन सफल रहे, तो यह तकनीक:
EV उद्योग में लागत कम करेगी।
भारत को तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत करेगी।
रोजगार सृजन और स्वदेशी नवाचार को बढ़ावा देगी।
हालांकि, कंपनी का दावा अभी बड़े पैमाने पर स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुआ है, लेकिन शुरुआती पायलट्स में सकारात्मक परिणाम मिले हैं।
विमैग लैब्स का यह कदम न केवल EV सेक्टर बल्कि पूरे मैन्युफैक्चरिंग और डिफेंस सेक्टर के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है। भारत अब रेयर अर्थ मैग्नेट्स की वैश्विक निर्भरता से मुक्ति की ओर एक ठोस कदम बढ़ा रहा है।


