विकासनगर (उत्तराखंड): नवाबगढ़ खादर बस्ती में सड़क निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों की घोर अनदेखी ने एक मासूम की जान ले ली। 7 वर्षीय बालक अरमान की मौत लोक निर्माण विभाग (PWD) और निर्माण ठेकेदार की लापरवाही का दर्दनाक नतीजा बन गई है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, भारी वाहनों की आवाजाही के लिए बनाए जा रहे मुख्य मार्ग पर मजबूत कंक्रीट की कवर्ड ड्रेन के बजाय मात्र 10 इंच का खुला और असुरक्षित पीवीसी पाइप छोड़ दिया गया था। निर्माण स्थल पर न तो कोई बैरिकेडिंग की गई, न ही घेराबंदी या चेतावनी बोर्ड लगाए गए। जिसके चलते खेलते हुए अरमान ड्रेन में गिर गया और उसकी मौत हो गई।
जनता की गाढ़ी कमाई से स्वीकृत इस 3 करोड़ रुपये की परियोजना को लोगों की सुविधा के लिए बनाया जाना था, लेकिन सुरक्षा मानकों की अनदेखी ने इसे जानलेवा बना दिया। नियमों के मुताबिक निर्माणाधीन साइट और खुले ड्रेनेज क्षेत्र के आसपास सुरक्षा व्यवस्था अनिवार्य है, लेकिन इस बुनियादी कदम को भी टाला गया।
स्थानीय लोग आरोप लगा रहे हैं कि जब सड़क का निर्माण शुरू हुआ था, तब स्थानीय जनप्रतिनिधि और अधिकारी प्रोजेक्ट की प्रशंसा में व्यस्त थे, लेकिन अब एक मासूम की जान चले जाने के बाद सबकी चुप्पी साध ली है।
पीड़ित परिवार और स्थानीय लोगों की मांगें:
सड़क के टेंडर, स्वीकृत डिजाइन, DPR (Detailed Project Report) और सुरक्षा मानकों की उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच कराई जाए।
लापरवाह अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा और न्याय सुनिश्चित किया जाए।
भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों से जब इस मामले पर प्रतिक्रिया मांगी गई तो उन्होंने कहा कि जांच की जा रही है। हालांकि, पीड़ित परिवार और स्थानीय लोग तुरंत कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
यह घटना एक बार फिर सवाल उठाती है कि विकास के नाम पर जनता के पैसे से हो रहे कामों में सुरक्षा और जिम्मेदारी का स्तर क्यों इतना निचला रह जाता है? क्या विकास सिर्फ सड़क बनाने तक सीमित है या उसमें लोगों की जान की सुरक्षा भी शामिल है?
सूत्रों के मुताबिक कुछ छुटभए क्षेत्रीय नेताओं ने ले देकर मामला शांत करने की जुगत में है


