सीओ दफ्तर एक माह में खाली करने के आदेश
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विकासनगर। डाकपत्थर क्षेत्र की भूमि से जुड़े दशकों पुराने दीवानी विवाद में अपर जिला जज (विकासनगर) नंदन सिंह की अदालत ने बुधस्पतिवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया।
अदालत ने राज्य सरकार और सिंचाई विभाग के दावे को खारिज करते हुए वादग्रस्त संपत्ति से पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) कार्यालय हटाकर एक महीने के भीतर असल मालिकों को वास्तविक कब्जा सौंपने के आदेश दिए हैं। डाकपत्थर के नेहरू मार्केट निवासी वेद प्रकाश ने अपनी भूमि के स्वामित्व और सरकारी विभाग की ओर से कथित अवैध कब्जे को लेकर अदालत में अपील दायर की थी।
हालांकि, न्याय की उम्मीद में लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने वाले वादी वेद प्रकाश का यह फैसला आने से पहले ही निधन हो गया। अब अदालत ने उनकी अपील को स्वीकार करते हुए निचली अदालत की ओर से 19 मार्च 2016 को दिए गए निर्णय को निरस्त कर दिया। वर्तमान में इस विवादित जमीन पर पुलिस क्षेत्राधिकारी विकासनगर का कार्यालय संचालित हो रहा है। सुनवाई के दौरान वादी पक्ष ने न्यायालय के समक्ष पंजीकृत रजिस्ट्री, खतौनी और अन्य पुख्ता अभिलेखों के माध्यम से भूमि पर अपना स्वामित्व साबित किया।
इसके विपरीत, सिंचाई विभाग और राज्य सरकार यह सिद्ध करने में पूरी तरह विफल रहे कि विवादित भूमि का कभी विधिसम्मत तरीके से अधिग्रहण किया गया था। अदालत ने अपने निर्णय में स्पष्ट टिप्पणी की कि केवल राजस्व अभिलेखों में नाम दर्ज होने मात्र से स्वामित्व सिद्ध नहीं होता। सरकारी पक्ष के गवाह भी भूमि पर वैध सरकारी अधिकार का कोई ठोस कानूनी आधार प्रस्तुत नहीं कर सके।
19 साल का देना होगा अंतकालीन लाभ :
न्यायालय ने राज्य पक्ष को न सिर्फ अवैध कब्जा हटाने के आदेश दिए हैं, बल्कि भारी हर्जाना भी लगाया है। अदालत के आदेशानुसार, प्रतिवादियों को 1 सितंबर 2007 से लेकर वास्तविक कब्जा सौंपे जाने तक 150 रुपये प्रतिदिन की दर से अंतकालीन लाभ (मेस्ने प्रॉफिट) अदा करना होगा।
इसके साथ ही, इस कुल राशि पर निर्णय की तिथि से अंतिम भुगतान होने तक छह प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज भी देय होगा।
आरोंपी को मिली जमानत
विकासनगर। विशेष न्यायाधीश एनडीपीएस एक्ट नंदन सिंह की अदालत ने कुंजाग्रांट निवासी मारुक उर्फ काला को जमानत दे दी। उसे 30,000 रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र और इतनी ही धनराशि के दो विश्वसनीय जमानती प्रस्तुत करने पर जमानत पर छोड़ा जाएगा। विकासनगर कोतवाली पुलिस ने 12 जून को आरोपी को पीएचसी कुंजाग्रांट के पास से 212 ग्राम चरस के साथ गिरफ्तार किया गया था।
आरोपी के भाई की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि आरोपी निर्दोष है और उसे झूठा फंसाया गया है। अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए कहा था कि अपराध गंभीर प्रकृति का है।
अदालत से
न्यायालय के आदेश के बारे में फिलहाल जानकारी नहीं है। अगर आदेश आया है तो मामले में शासन स्तर से आगे की कार्यवाही होगी।
— विवेक सिंह कुड़ियाल, सीओ, विकासनगर


